boycott china product

भारत चीन सीमा विवाद के बीच देश में कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर चीनी सामान और सॉफ्टवेयर के बहिष्कार boycott china product की मुहिम छेड़ दी है इसी पर एशिया के इन दो बड़ी ताकतों के बीच जैसे-जैसे तनाव बढ़ता जा रहा है भारत में चीन विरोधी भावनाएं भी मुखर हो रही हैं पर यह भी एक सच्चाई है कि भारत के रसोईघर बेड रूम, एयर कंडीशन इन मशीनों की शक्ल में मोबाइल फोन और डिजिटल वॉलेट के रूप में  चीन कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में मौजूद है .लोकल से वोकल के लिए वह कल के पीएम मोदी के नारे के तहत भले ही फ्लिपकार्ट और अमेजन ने भारत में बनी चीजों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया हो लेकिन कारोबार जगत अभी भी पूरी तरह से boycott china product इसके पक्ष में नहीं दिख रहा है.

china product investement(निवेश )

चीन ने भारत में 6 अरब डॉलर से भी ज्यादा का निवेश कर रखा है जबकि पाकिस्तान में उसका निवेश 30 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है मुंबई के विदेशी मामलों के थिंक टैंक गेटवे हाउस ने भारत में ऐसी पिक्चर तर कंपनियों की पहचान की है जिनमें चीन का निवेश है.

रिपोर्ट में जानकारी सामने आई है कि भारत की 30 में से 18 यूनिकॉर्न में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है यूनिकॉर्न एक निजी स्टार्टअप कंपनी को कहते हैं जिसकी कीमत $1000000000 हो तो 30 में से 18 यूनिकॉर्न में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में निवेश करते करते एक तरह से चीन ने भारत पर अपना कब्जा जमा लिया है उदाहरण के लिए बाइक डांस टिक टॉक की मूल कंपनी है जो चीन की है और यह भारत में काफी लोकप्रिय है हालांकि निवेश पर भारत सरकार को बदला जमीन से जुड़े सभी निवेशकों को पहले भारत सरकार की मंजूरी लेनी होगी इस नए फैसले ने चीनी कारोबारियों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है लेकिन यह फैसला उस निवेश को प्रभावित नहीं करेगा जो अप्रैल से पहले हो चुका है .

चीनी निवेश की जांच करने की नई भारतीय नीति के बावजूद भारत में चीन की मौजूदगी हर जगह दिखती है पर ऐसा भी नहीं है कि फैसले के बाद चीनी निवेश को मंजूरी नहीं दी गई है उदाहरण के लिए मलेरिया की दवाई हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन को देखिए इस दवा का इनग्रेडिएंट्स चीन से इंपोर्ट किया जाता है क्रॉसिंग जिसका इनग्रेडिएंट पेरासिटामोल भी चीन से आता है .boycott china product मुहीम को आगे बढ़ाना मुशकील दिक् रहा है .

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भारत का आर्थिक संघर्ष कोरोनोवायरस से बहुत पहले शुरू हुआ

China product imports (चीनी सामान का आयात)

भारत की दवा बनाने वाली कंपनियां करती इनग्रेडिएंट चीन से आयात करती हैं और यह बात खुद सरकार  ने China product imports (चीनी सामान का आयात ) संसद में बताइए 2018 -19 में भारत ने चीन से 2.4 अरब डॉलर मुल्ले की दवाइयां और इनग्रेडिएंट लिए हैं चीनी एपी आईएस एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट पर निर्भरता भी इसकी वजह है भारत-चीन के रॉ मैटेरियल को प्राथमिकता देता है क्योंकि यह बहुत सस्ता है और सामग्री में आसानी से उपलब्ध है मतलब यह हुआ कि दोनों देश एक-दूसरे पर डिपेंडेंट है. इससे हम समज सकते है की किस तरह boycott china product मुहीम को आगे बढ़ाना मुशकील दिक् रहा है .

यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर ने बताया माल बेचने वाली कंपनियां भारत की दवाई बनाने वाली कंपनियों के बिना नहीं चल पाएंगे लेकिन यह भी तथ्य है कि मौजूदा वक्त में भारत को चीन की ज्यादा जरूरत है ना कि चीन को भारत की उनके द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन से यह स्पष्ट होता है व्यापार में चीन का पलड़ा भारी है बीते साल दोनों देशों के बीच करीब 90 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था तो फिर कहते हैं कि इसे आसान तरीके से कहें तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में विकास के अलग-अलग स्तर पर है.

China product imports
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China trade ( चीन का व्यापार)

 ट्रेड इन बैलेंस से भारत को फायदा भी हो रहा है सस्ते चीनी उत्पादों को इंपोर्ट करके भारत में अपने फॉरेन करंसी रिजल्ट को बचाया है दिल्ली में थिंक टैंक सोसायटी फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड एंपावरमेंट की डॉक्टर मेहजबीन बानो का तर्क है कि चीन भी बड़े भारतीय बाजार को नजरअंदाज नहीं कर सकता है .

जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर सोहन सिंह का कहना है कि कई देश चीन के साथ व्यापार असंतुलन से पीड़ित हैं भारत के साथ चीन का व्यापार पिछले 15 वर्षों में लगभग एकतरफा हो और यह अधिकतर दूसरे देशों के साथ चीन के व्यापार का सच है लेकिन भारत में चीन के बहिष्कार को लेकर जो boycott china product कैंपेन चल रहे हैं उन पर चीन कैसे व्याख्यान दे रहा है.

,भारतीय सोशल मीडिया पर चीन विरोधी आंदोलन के लिए चीनी सॉफ्टवेयर को हटाने से लेकर चीनी उत्पादों  boycott china product का बहिष्कार करने तक चीनी लोग इस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं और अगर चीन ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाला है तो भारत ने भी चीनी समाज पर कुछ प्रभाव डाला है प्रोफेसर हुआ इंसान कहते हैं कि एलएसी पर हो रही घटनाओं के कारण हम बॉलीवुड फिल्म दार्जिलिंग चाय और भारतीय रेस्टोरेंट से परहेज तो नहीं कर सकते हैं.

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