न्यूजीलैंड ने कांटेक्ट ट्रेसिंग से कोरोनावायरस कि लड़ाई में काबू पला लिया बिना ताली बजाकर.

न्यूजीलैंड ने कांटेक्ट ट्रेसिंग से कोरोनावायरस कि लड़ाई
Original:Albert Hastings MarkhamVector

 

जब कोई देश कोविड-19 से लड़ रहा हो और उसे एक लंबे समय की लड़ाई के बाद काबू में पालिया न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जसिंडा  अर्डर्न  (Jacinda Ardern  )लेबर पार्टी की नेता 39 साल की इस नेता ने जब अपने देश को बताया कि न्यूजीलैंड में एक भी कोरोनावायरस एक्टिव केस नहीं बचा है  न्यूजीलैंड ने कांटेक्ट ट्रेसिंग से कोरोनावायरस कि लड़ाई जीत लिया है तो इस मौके पर उन्होंने जरा सा झूम लेने का मन बनाया और थोड़ा सा डांस कर लिया यह कामयाबी न्यूजीलैंड ने ताली बजाकर हासिल नहीं की बल्कि अपनी योजनाओं को जमीन पर उतारा और जनता के साथ बेहतर संवाद कायम किया अब वहां पर लेवल 4 की पाबंदी को घटाकर लेवल 1 की पाबंदी पर ले आया गया है यानी देह से दूरी की बंदिशें समाप्त हो गई.

न्यूजीलैंड में कोविड-19 से अब तक 22 लोगों की ही मौत हुई है, 1504 केस जिनमें से 1482 ठीक हो कर घर जा चुके हैं और 2 हफ्ते से कोई भी नया केस नहीं आया है 8 जून की मध्यरात्रि को न्यूजीलैंड में ऐलान किया गया कि अब उनका देश लेवल 1 की बंदिशों पर प्रतिबंधों पर पहुंचता है यानी कि जनजीवन सामान्य किया जाता है बस उसकी वेट कर रहे हैं लेकिन एक दूसरे में 2 मीटर की दूरी बनाकर रखी हुई है

न्यूजीलैंड ऐसा दिखने लगा है जिंदगी पटरी पर फिर से दौड़ती हुई नाइटक्लब पूरी तरह खुल गया है रातें फिर से जवान होने लगी रेस्त्रां में पाबंदियां हटा ली गई है कांटेक्ट  ट्रेसिंग  {contact tracing }का सिस्टम इतना दुरुस्त हो चुका है कि सरकार को भी भरोसा है कि अगर कोई केस आ भी गया तो ढूंढ लिया जाएगा कि किस-किस से आया है।

कांटेक्ट  ट्रेसिंग  {contact tracing }का सिस्टम क्या है?

न्यूजीलैंड में  कांटेक्ट रेसिंग से मतलब यह है कि जैसे भी कहीं कोई जाता है कोई आता है सब अपना रिकॉर्ड खुद रख रहे थे और जहां भी जा रहे थे वहां अपना नाम एड्रेस (Address ) अपनी डिटेल (Detail) सब लोग लिख रहे थे ताकि अगर कल कोई पॉजिटिव केस निकलता है तो वह उन लोगों तक पहुंच सके जो जो उस जगह पर आए हैं और उनको आइसोलेट (Isolate) कर सकें न्यूजीलैंड ने क्यूआर कोड  QR CODE के जरिए यह व्यवस्था बना दी है कि आप जिस भी इमारत में जाएंगे दुकान में जाएंगे दफ्तर में जाएंगे आपको भी वह बारकोड स्कैन करना होगा और इससे होगा क्या कि आपके हर जगह जाने का एक रिकॉर्ड दर्ज हो फिर अगर आप संक्रमित होते हैं तो पता चलेगा कि आप के संपर्क में कौन-कौन आया  और आप किस से संक्रमित हो सकते है और आप के कारण किस-किस को हो सकता है.

कांटेक्ट ट्रेसिंग
Image by Gerd Altmann

अब आप कहेंगे कि क्या यहां प्राइवेसी का मामला नहीं बिल्कुल है अगर आप यह सिस्टम विश्वसनीय तरीके से बनाते हैं इसके कानून कायदे विश्वसनीय तरीके से बनाते हैं इसमें जनता की भी भूमिका हो पारदर्शी हो तो किया जा सकता है ऐसा नहीं हो सकता कि आप सारी जानकारियों को छुपा लें और सिर्फ आदेश दे दे उस के दम पर यह व्यवस्था आप नहीं बना सकते हैं जो कि आप नहीं बना पाए तो क्यूआर कोड के जरिए न्यूजीलैंड ने यह लड़ाई जी ती है.

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न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री कि कामयाबी

प्रधानमंत्री जसिंडा  अर्डर्न  ने कांटेक्ट ट्रेसिंग से कोरोनावायरस कि लड़ाई जीत लिया है लेकिन कामयाबी के जोश में भी होश रही कहती कि दुनिया अभी भी कोरोना की चपेट में है तो हमें सतर्क रहना होगा क्योंकि ऐसे केस फिर से आ सकते हैं लेकिन लेवल वन पर हम जा रहे हैं गर्व करने की बात अब इसका लाभ उठाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर लग जाना चाहिए 28 फरवरी को न्यूजीलैंड ने पहला केस आया था.

इस वक्त भी वहां की प्रधानमंत्री  कहती हैं कि बीमार हैं तो घर पर हैं हाथ साफ रखें बुखार हो तो कोविड-19 के टेस्ट कराएं आप कहां कहां जा रहे हैं उसका हिसाब रखें दूसरे का ख्याल रखें और किसी भी लेवल की चेतावनी के लिए तैयार ही रहे.

न्यूजीलैंड ने कोविड-19 के प्रचार शुरू से ही अपनी पकड़ को बनाए रखा 28 फरवरी से 15 मार्च तक यहां मात्र आठ के 22 मई तक कुल संक्रमण की संख्या 1504 हो गई और उसके बाद रफ्तार थमने लगी 30 मई तक एक्टिव केस एक हो 8 जून को एक्टिव केस की संख्या जीरो जब आखरी मरीज ठीक हो कर घर चला गया 22 मई के बाद न्यूजीलैंड में के बड़ा ही नहीं यानी एक भी के नहीं आया है 28 मई को अंतिम बार वहां पर एक शख्स की मौत हुई .

न्यूजीलैंड और गुरुग्राम की आबादी

हेल्थ डायरेक्टर जनरल एश्ले ब्लूमफील्ड ने कहा कि वह तारी हमारे मुल्क के सफर में एक अहम मोड़ है  न्यूजीलैंड के शहरों की आज तस्वीरें दौड़ती भागती नजर आ रही हैं आप यही समझ रहे होंगे कि मूल की आबादी कितनी 50 लाख की आबादी वाले न्यूजीलैंड के लिए ऐसा करना संभव रहा हो तो हुजूर एक बात बताइए दिल्ली के पास में है गुरुग्राम 30 लाख की आबादी है इस 1 जिले में तो न्यूजीलैंड जैसी कामयाबी हासिल की जा सकती है क्योंकि वहां ताला बंदी के 80 दिनों के बाद भी सबसे तेजी से किस बड़ी रहे हैं न्यूजीलैंड की कामयाबी इतनी भी मामूली नहीं कि आप आबादी के नाम पर किनारे कर दें नहीं वहां थाली बजाने का हुक्म हुआ और  नहीं जनता सब कुछ भुला भी चुकी है.

भारत का आर्थिक संघर्ष कोरोनोवायरस से बहुत पहले शुरू हुआ

प्रधानमंत्री जसिंडा  अर्डर्न ने बेहतर तरीके से अपने देश को संभाला.

प्रधानमंत्री
Image by mohamed Hassan

ऑकलैंड न्यूजीलैंड का बिजनेस सेंटर वाला शहर जैसा आदि ने 3 साल के अपने कार्यकाल में कई चुनौतियों का बखूबी सामना किया है ज्वालामुखी फटने और क्राइस्ट चर्च की मस्जिद में जब गोली चली थी तब उन्होंने काफी बेहतर तरीके से अपने देश को संभाला यही कोविड-19 के बीच में उन्हें बजट भी पेश करने का मौका मिला और नियमित रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करती रही और फेसबुक लाइफ के जरिए जनता से बात करती रहें एक तरफा भाषण नहीं दिया बल्कि सवालों के जवाब भी देती है

भारत में जिस दिन तालाबंदी हुई उसके 1 दिन बाद यानी 25 मार्च को न्यूजीलैंड ने तालाबंदी की बिजनेस स्कूल दफ्तर सब बंद कर दिए गए कदम काफी सकते मगर परिणाम अब सुखद रहे हैं भारत में भी टीम इंडिया की बात हुई लेकिन अब आप देख रहे हैं कि उस टीम का क्या हाल है लेकिन न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री हमेशा पूरे देश को 50 lack की टीम कहकर संबोधित करती रहें न्यूजीलैंड ने तालाबंदी हटाने में जल्दबाजी नहीं की बल्कि लंबा इंतजार किया 2 हफ्ते तक जब कोई केस नहीं आया तब जाकर यह ऐलान किया गया कि न्यूजीलैंड में कोई केस नहीं इसके पहले एलईडी स्क्रीन लगाकर कोई चुनावी रैली नहीं की गई.

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